ममता बनर्जी की ये कृष्ण-अर्जुन की जोड़ी अब भाजपा को दिलाएगी सफलता, पूरे बंगाल में है खासा प्रभाव

कोलकाता। उत्तर 24 परगना के भाटपाड़ा से विधायक अर्जुन सिंह ने गुरुवार को भाजपा का दामन थाम लिया। बंगाल के राजनीतिक पंडितों का दावा है कि अर्जुन का भाजपा में जाना पूरे बंगाल में पार्टी के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय और राज्य प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय की मौजूदगी में अर्जुन सिंह ने भाजपा का दामन थामा और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमलावर हो गए। अर्जुन के भाजपा में जाने के बाद बंगाल में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई हैं।

अर्जुन ही तय करते हैं काम

अर्जुन उन नेताओं में शामिल हैं, जिनका अपने क्षेत्र के एक-एक मतदाता पर अच्छी खासी पकड़ है। उनका रुतबा इतना है कि उत्तर 24 परगना में नैहटी से लेकर बनगांव तक किसी को अगर अपनी छोटी से छोटी जमीन अथवा घर बेचना होता है तो उसकी कीमत और ग्राहक अर्जुन तय करते हैं। जिले में कहां किस तरह से क्या काम होगा? यह अर्जुन सिंह के इशारे पर होता है।

बैरकपुर लोकसभा सीट से टिकट मिलना तय

अर्जुन को भाजपा की ओर से बैरकपुर लोकसभा सीट से टिकट मिलना लगभग तय माना जा रहा है, क्योंकि यह सीट हिन्दी भाषी बहुल इलाका है। यहां बड़ी संख्या में जूट मिल हैं और इसमें काम करने वाले लोग बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड से आकर लोग बसे हैं। इन सबके बीच अर्जुन सिंह का इशारा हुक्म की तरह काम करता है। किसी डर की वजह से नहीं बल्कि उनके कार्य की वजह से लोग उन्हें बेहद पसंद करते हैं। अब जब वह भाजपा में चले गए हैं तो बंगाल के ज्यादातर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह भाजपा के लिए न केवल बैरकपुर बल्कि पूरे बंगाल में हिंदी भाषियों के वोट को अपने पाले में करने के लिए गेम चेंजर साबित होने वाले हैं।

भाजपा में जितने भी नेता शामिल हुए हैं, उनमें अर्जुन सिंह का जाना सबसे बड़ी उपलब्धि

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो अब तक तृणमूल अथवा अन्य पार्टियों से भाजपा में जितने भी नेता शामिल हुए हैं, उनमें अर्जुन सिंह का जाना सबसे बड़ी उपलब्धि है। बंगाल में करीब 50 लाख हिन्दी भाषी मतदाता हैं। ममता बनर्जी ने अर्जुन को बंगाल में पूरे हिन्दी भाषी मतदाताओं को अपने पक्ष में रखने के लिए इंचार्ज बनाया था। वर्ष 2009 एवं 2014 लोकसभा और उसके बाद हर एक विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका हिन्दी भाषियों को तृणमूल के पक्ष में करने में बहुत बड़ी थी। लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी ने हिन्दी इकाई गठित की थी, जिसका अध्यक्ष अर्जुन को ही बनाया गया था।

अब वे भाजपा में शामिल हो गए हैं और यह साफ है कि बिहार, उप्र और झारखंड के जो लोग यहां रहते हैं, उनका वोट भाजपा में जाने वाला है। 2017 से पहले ममता के बेहद करीबी रहे मुकुल रॉय ने जब भाजपा का दामन थामा था तो उसे महज एक राजनीतिक घटनाक्रम के तौर पर देखा गया था, लेकिन अब अर्जुन सिंह का जाना एक बहुत बड़ा घटनाक्रम है। जिस तरह से धीरे-धीरे लोग तृणमूल छोड़कर भाजपा में जा रहे हैं, उससे यह साफ हो चला है कि पार्टी संगठन पर ममता बनर्जी की पकड़ धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है।

ममता बनर्जी का अपने नेताओं पर अब पहले की तरह नियंत्रण नहीं

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो बैरकपुर से अर्जुन सिंह की जीत तय है। वहां जितने भी हिन्दी भाषी मतदाता हैं, वे एकजुट तौर पर अर्जुन के पक्ष में मतदान करेंगे। यह तृणमूल के लिए बहुत बड़ा झटका साबित होने वाला है। अगर निष्पक्ष चुनाव नहीं हुआ तो इसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ सकता है, लेकिन अगर शांतिपूर्वक तरीके से निष्पक्ष चुनाव होता है तो वहां से भाजपा की जीत तय है। अर्जुन जैसे नेता का तृणमूल छोड़कर भाजपा में जाना इस बात का संकेत है कि ममता बनर्जी का अपने नेताओं पर अब पहले की तरह नियंत्रण नहीं रह गया है।

कभी मुकुल और अर्जुन की जोड़ी ममता के लिए थी कृष्ण-अर्जुन की जोड़ी

उल्लेखनीय है कि एक दौर था जब तृणमूल कांग्रेस में पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के बाद मुकुल रॉय सबसे शीर्षस्थ नेता थे और उत्तर 24 परगना में उनके विश्वासपात्र सिपाहियों में अर्जुन सिंह सबसे पहले थे। दोनों की जोड़ी कृष्ण-अर्जुन की तरह थी जो हरेक चुनाव में तृणमूल के लिए महाभारत युद्ध की तरह निर्णायक साबित होती रही। अब यह जोड़ी भाजपा में आ गई है तो निश्चित तौर पर यह पार्टी के लिए बहुत बड़ी सफलता लाने वाली होगी। अर्जुन ने उत्तर 24 परगना के बैरकपुर से लोकसभा का चुनाव तृणमूल के टिकट पर लड़ना चाहा था, लेकिन ममता बनर्जी ने गत सोमवार को उन्हें मंत्री बनाने का आश्वासन देकर सीटिंग सांसद दिनेश त्रिवेदी को ही टिकट दे दिया। इससे अर्जुन नाराज थे और अब भाजपा में शामिल हो गए हैं।

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