उत्तराखंड: राज्य की पांच लोकसभा सीटों का चुनावी गणित

चुनावी मौसम में लहरों पर सवारी करने वाले पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में मोदी लहर बनाने की कोशिशें जारी हैं. विधानसभा चुनाव में दिग्गजों के दलबदल, लचर संगठन और संसाधनों की कमी के बावजूद कांग्रेस पूरे खम के साथ ताल ठोंक रही है.

होर्डिंग-बैनरों में भाजपा ज्यादा चमक रही है. चुनावी रंगत रोज बदल रही है. पर नहीं लगता कि 16 में से नौ आम चुनावों की तरह इस बार भी वोट एकतरफा नहीं पड़ेगा.

2014 में भाजपा ने सभी सीटें जीती थीं, जबकि 2009 में कांग्रेस ने. गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों में इस बार तासीर थोड़ी भिन्न है. गढ़वाल मंडल की दो सीटों पर सीधा और एक पर मुकाबला तिकोना है. कुमाऊं की दो सीटों पर भी टक्कर कांटे की है.

उत्तराखंड की 5 लोकसभा सीटों पर इस बार कड़े मुकाबले के हालात

पौड़ीः जनरल की साख का सवाल

जनरल खंडूरी की इस सीट पर निवर्तमान सांसद खंडूरी के बेटे मनीष कांग्रेस का चेहरा हैं. सामने हैं पिता के करीबी भाजपा के तीरथसिंह रावत. तीरथ जमीनी नेता हैं और संगठन के साथ चुनाव प्रबंधन भी अच्छा है. मनीष युवा चेहरा हैं. गोपेश्वर के क्रांति भट्ट कहते हैं कि बाजार में मोदी-मोदी है लेकिन कांग्रेस के साथ दिख रहे युवा बता रहे हैं कि सत्ता विरोधी रुझान भी काम कर रहा है.

टिहरीः पहली बार लोकतंत्र बनाम राजतंत्र

रानी माला राजलक्ष्मी तीसरी बार भाजपा का चेहरा है. उनकी सांसद निधि खर्च नहीं होती, जनता के बीच भी नहीं जाती, खुद चैरिटी करती हों ऐसा भी नहीं, लेकिन उन्हें वोट खूब पड़ते है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह उन्हें कड़ी चुनौती दे रहे हैं. पहली बार राजवंश बनाम लोकतंत्र का नारा बोला जा रहा है. भाजपा का संगठन काफी मजबूत है और इसका फायदा मिलने की उम्मीद है.

हरिद्वारः मुस्लिम वोटर निर्णायक

भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के पास गिनाने के लिए बहुत से काम हैं. सक्रिय भी काफी हैं. उनके सामने हैं कांग्रेस के पूर्व विधायक अम्बरीश कुमार और बसपा के अंतरिक्ष सैनी. करीब ढाई लाख कैडर वोट, डेढ़ लाख सैनी वोट और सपा के पांच लाख से ऊपर मुस्लिम मतों पर बसपा की उम्मीद टिकी है. मुस्लिम वोटर मायावती की जगह राहुल की रैली में अधिक दिखे हैं.

अल्मोड़ाः जंग टम्टा बंधुओं के बीच

यहां पहाड़ के आदमी को रोटी चाहिए, रोजी यहां है नहीं. पहाड़ की पीड़ा भाजपा और कांग्रेस के भाषणों में नहीं दिख रही है. केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री अजय टम्टा सीट बचाने के लिए ज्यादा ही जोर लगा रहे हैं. सीएम की 6 सभाएं हो चुकी हैं. 11 विधायक मोर्चे पर हैं. कांग्रेस उम्मीदवार प्रदीप टम्टा पढ़े-लिखे इंटेलेक्चुअल छवि वाले हैं. अजय के पास गिनाने के लिए बड़ा काम नहीं है.

नैनीतालः भगतदा के गढ़ में परीक्षा

वर्तमान सांसद भगत सिंह कोश्यारी के गढ़ में भाजपा की परीक्षा है. कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत मैदान में हैं. भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट को आगे किया है. पिछले विधानसभा चुनाव में हरीश रावत मुख्यमंत्री होते हुए किच्छा सीट भी नहीं बचा पाए थे और अजय भट्ट भाजपा की लहर में भी रानीखेत से हार गए थे. भाजपा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका भगत सिंह की रहने वाली है.

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