सादगी की मिशाल: लालटेन की रोशनी में पढ़कर IAS बने अवनीश शरण, अब बेटी को भी सरकारी स्कूल में पढ़ा रहे हैं

सरकारी स्कूलों के आज क्या हालात हैं सब जानते हैं। हरकोई प्राइवेट स्कूलों की तरफ बढ़ रहा है। ऐसे में एक IAS ऐसे भी हैं जो अपनी बेटी को सरकारी स्कूल में पढ़ाते हैं और इतना ही नहीं वो खुद भी लालटेन की रौशनी में पढ़े हैं।

जी हां हम बात कर रहे हैं 2009 के IAS अवनीश शरण की। वैसे तो वो पहले से ही अपने काम को लेकर चर्चा में रहते हैं लेकिन पूरे देश में लोग उनके नाम से तब परिचित हुए जब उन्होंने अपनी बेटी का दाखिला एक सरकारी स्कूल में कराया था। अवनीश शरण इकलौते ऐसे IAS अधिकारी थे जिन्होंने अपनी बिटिया का दाखिला किसी प्राइवेट नहीं बल्कि सरकारी स्कूल में कराया और देश के सामने एक मिसाल पेश की।

देशभर में उनकी खूब तारीफ हुई थी। भारत में आज भी कई ऐसे प्रशासनिक अधिकारी हैं, जो अपना फर्ज पूरी तरह निभाने के साथ-साथ हर वक्त आम आदमी की मदद के लिए तैयार रहते हैं। ऐसे ही हैं IAS अवनीश शरण। IAS अधिकारी अवनीश शरण युवा अधिकारियों और जनता के बीच खास लोकप्रिय हैं। आमतौर पर गांव के सरकारी स्कूलों की हालत बेहद दयनीय होती और शिक्षा राम भरोसे ही रहती है। लेकिन इन सबके बावजूद अवनीश शरण की बिटिया आज भी उसी स्कूल में पढ़ रही है। जो वाकई काबिलेतारीफ है। जब अधिकारी ने अपनी बेटी का दाखिला सरकारी स्कूल में कराया तो उसके बाद से स्कूल की हालत में काफी सुधार हुआ।

पिछले साल जुलाई में अपनी बेटी वेदिका शरण का दाखिला जिला मुख्यालय में स्थित सरकारी स्कूल प्रज्ञा प्राथमिक विद्यालय में कराया था। इससे पहले वेदिका को आंगनबाड़ी भी भेजा था। इस स्कूल में काफी सुविधाएं भी हैं। यहां बच्चों को समझाने के लिए क्लासरूम में प्रोजेक्टर और एलईडी स्क्रीन भी लगाई जा चुकी हैं। सरकारी स्कूल के बदले हालात देखकर जिले के दूसरे सरकारी स्कूलों के हालात भी अब काफी बदल चुके हैं।

कलेक्टर अवनीश शरण शिक्षा के मामले में हमेशा सजग रहते हैं और हमेशा इस क्षेत्र में आने वाली समस्याओं का समाधान करते रहते हैं। पिछले साल की ही बात है जब सरकारी स्कूल के टीचर हड़ताल पर चले गए तो उन्होंने गांव के पढ़े-लोगों को स्कूलों में जाकर पढ़ाने की अपील की थी। बेटी का दाखिला कराने वाली अवनीश शरण का कहना है कि अधिकारी ही सरकारी स्कूलों पर भरोसा नहीं करते हैं तो जनता क्या करेगी।

सभी अधिकारी बड़े प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों का एडमिशन कराते हैं। हमें सरकारी संस्थाओं में यकीन करना चाहिए तभी उनकी हालत सुधर सकती है। अवनीश शरण ने बताया था कि उनके घर में बिजली की कोई सुविधा नहीं थी। लाइट ना होने की वजह से उन्हें लालटेन की रोशनी में पढ़ाई की। गांव में और कॉलेज की पढ़ाई के दौरान आईएएस अधिकारियों को देखकर उनके मन में समाज के लिए काम करने के ख्वाब पलने लगते थे। बिहार के समस्तीपुर जिले के केवटा गांव के रहने वाले अवनीश सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं क्षेत्र के विकास में भी आगे रहते हैं। अवनीश कहते हैं कि हमें एक जिंदगी मिलती है और जितना हो सके अच्छे काम करते रहने चाहिए। सोशल मीडिया पर उनकी काफी तारीफ होती रहती है। लोगों का कहना है कि कलेक्टर के बेटी को सरकारी स्कूल से व्यवस्थाएं अच्छी रहेंगी और अध्यापक सही से अपना काम करेंगे।

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