इस तरह हर सुबह फिर से कुंवारी बन जाती थी द्रौपदी, भगवान शिव से मिला था वरदान

वैसे तो आपने कई सारे कहानियों के बारे में सुना होगा लेकिन ये भी बता दें कि इनमें से कुछ कहानियां ऐसी भी है जो काफी ज्यादा प्रचलित हैं। आज हम आपको महाभारत के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमें की सबसे प्रसिद्ध पात्रों में से एक है द्रौपदी। इस महाकाव्य के अनुसार द्रौपदी पांचाल देश के राजा द्रुपद की पुत्री है जो बाद में पांचों पाण्डवों की पत्नी बनी। दरअसल द्रौपदी पंच-कन्याओं में से एक हैं जिन्हें चिर-कुमारी कहा जाता है।

प्राचीन भारत के महाकाव्य महाभारत के अनुसार द्रौपदी का जन्म महाराज द्रुपद के यहाँ यज्ञकुण्ड से हुआ था। अतः यह यज्ञसेनी भी कहलाई। द्रौपदी पूर्वजन्म में किसी ऋषि की कन्या थी। महाभारत की कहानी की अलग-अलग विद्धान अलग-अलग तरह से व्याख्या करते हैं। महाभारत से संबंधित कई लोकप्रिय कथाएं भी मिलती हैं। इसी श्रेणी में एक है जांबुल अध्याय जिसमें द्रौपदी अपने राज का खुलासा करती हैं। द्रौपदी पांच पांडवों की पत्नी थीं लेकिन वह अपने पांचों पतियों को एक समान प्यार नहीं करती थीं। वह सबसे ज्यादा अर्जुन से प्रेम करती थीं लेकिन दूसरी तरफ अर्जुन द्रौपदी को वह प्यार नहीं दे पाए क्योंकि वह कृष्ण की बहन सुभद्रा से सबसे ज्यादा प्यार करते थे।

वैसे कहा जाता है कि द्रौपदी युवा रूप में जन्मी थी। उनका जन्म महाराज द्रुपद के यज्ञ कुंड से हुआ था। द्रौपदी की इच्छा थी कि उनकी शादी जिससे भी हो उसमें 14 गुण होने चाहिए इतना ही नहीं इसलिए उन्होंने शिव जी की कड़ी तपस्या करना शुरू कर दी। इतना ही नहीं ये भी बता दें कि द्रौपदी की तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी आए और द्रौपदी से वरदान मांगने को कहा द्रोपदी ने 14 गुणों वाला पति मांगा शिव जी ने यह कहा कि यह 14 गुण एक ही इंसान में होना संभव नहीं है इसलिए मैं तुम्हें 14 गुणों वाले 14 इंसानों से शादी करने का वरदान दे रहा हूं। शंकर ने कहा कि अगले जन्म में उसके पांच भरतवंशी पति होंगे, क्योंकि उसने पति पाने की कामना पांच बार दोहरायी थी।

इसके अलावा शिव जी के वरदान देने के बाद द्रौपदी ने उनसे पूछा कि आप मुझे वरदान दे रहे हैं, तो ऐसा वरदान दें कि अगर मेरी शादी 14 पुरुषों से हुई तो यह मेरे लिए कलंकित करने वाली बात होगी और इसका उपाय भी शिव जी ने निकाला और उन्हें एक और वरदान दिया कि जब भी तुम सुबह उठ होगी तुम फिर से कुंवारी हो जाऊंगी। इतना ही नहीं ये भी बता दें कि शिव जी के वरदान से द्रौपदी की शादी पांचो पांडव से हुई जिनमें 14 गुण मौजूद थे। 14 गुणों वाले 14 इंसानों के बजाय उनका विवाह 14 गुणों वाले पांच पांडवों से हुआ।

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