हाईटेक होने की राह पर यूपी पुलिस

दैनिक संवाद न्यूज़ नेटवर्क (लखनऊ) : प्रशासन की मंशा पुलिस विभाग को हाईटेक करने की है। डॉयल-100 के पुरानी गाड़ियां को हटा कर नई गाड़ियां दी गई। घटनास्थल पर पहुंचने में समय न लगे, इसके लिए हर जिले को डॉयल-100 (Doyle-100) की पीआरवी दी गई। जिस पर प्रशिक्षित पुलिसकर्मी भी रखें गए है।

सीसीटीएनएस के तहत सभी थाने हुए ऑनलाइन

सीसीटीएनएस (क्राइम कंट्रोल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम) के तहत सारे थानें ऑनलाइन कर दिए गए है। एक ही तार से जिले और प्रदेश क सभी थाने जोड़ दिए गए हैं। थानों के कार्यालय और परिसर में हाई रिज्योल्यूशन के कैमरे लगा दिए गए हैं। जिससे कि थानों में चलने वाली गतिविधियों को जिले की पुलिस तो देख ही सके साथ ही राजधानी में बैठें वरिष्ठ अधिकारी भी जरूरत पड़ने पर देख सकें। जीडी (जनता दरबार) और मुकदमे के भी सभी कागजात ऑनलाइन हो गए हैं। शिकायतकर्ता को एफआईआर की कॉपी घर बैठे मिलने लगी है।

पुराने प्रभारी निरीक्षकों को दिया जाएगा प्रशिक्षण

अब प्रशासन की मंशा थानों को पेन एंड पेपरलेस करने की है। इससे जहां थानों में कागज का भरमार लगा रहता है उससे निजात मिला जाएगा। इसके साथ ही कागज के खर्च से भी छुट्टी मिल जाएगी। मोटी फाइलों की जगह रिकॉर्ड अब कंप्यूटर में फीड होगा। एक क्लिक में बदमाश की फोटो सहित पूरा रिकॉर्ड खुलकर सामने आ जाएगा। कर्मचारियों को अब भारी रजिस्टर उठाने और रिकॉर्ड मेन्टेन करने के का काम भी नहीं करना पड़ेगा। थानों के कार्यालय में भरपूर जगह होगी। थानाध्यक्षों और प्रभारी निरीक्षकों को भी कंप्यूटर और आईटी का प्रशिक्षण दिया जाएगा। आईटी एक्ट के मुकदमों की जांच प्रभारी निरीतक्षकों के स्तर से होती है।

शासन का मानना है कि पुराने प्रभारी निरीक्षकों को आईटी एक्ट की जानकारी कम है। इस कारण उन्हें आईटी का प्रशिक्षण देने के बाद लैपटॉप दिया जाए, जिससे वे थानों में होने वाले किसी भी काम की जानकारी चंद सेकेंडों में बिना किसी की मदद से ले सकें। जल्द ही योजना को मूर्त रूप दिया जाएगा।

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